January 28, 2026

श्रीश्याम बाबा (बर्बरीकजी) का जन्म, देवियों द्वारा अलौकिक शक्ति का वरदान (भाग-1)

KHATU BABA
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भीम और हिडिम्बा के पुत्र घटोत्कच शूरवीर योद्धा थे. घटोत्कच अपने परिजनों के दर्शन के लिए इन्द्रप्रस्थ आए तो श्रीकृष्ण ने पांडवों से घटोत्कच का शीघ्र विवाह कराने को कहा. पांडवों ने श्रीकृष्ण से अनुरोध किया कि वह घटोत्कच के लिए योग्य वधू सुझाएं.

श्रीकृष्ण ने कहा- असुरों के शिल्पी मूर दैत्य की बुद्धिमान एवं वीर कन्या कामकटंककटा ही इसके लिए सबसे योग्य है. मूरपुत्री मोरवी ने शर्त रखी है कि वह उस वीर से ही विवाह करेगी जो उसे शास्त्र और शस्त्र दोनों विद्याओं में परास्त कर दे. मैं घटोत्कच को स्वयं दीक्षित कर मोरवी का वरण करने भेजूँगा.

श्रीकृष्ण द्वारा दीक्षित होकर घटोत्कच मोरवी का वरण करने उसके दिव्य महल पहुंचे. देवी कामाख्या की अनन्य भक्त मोरवी शस्त्र विद्या में पारंगत थी. कामाख्या देवी ने उसे कई दिव्य शक्तियां दी थीं. उसके महल के द्वार पर उन वीरों की मुंडमालाएं लटक रही थीं जो मोरवी से विवाह के लिए आए थे किंतु परास्त होकर अपने प्राण गंवा बैठे.

घटोत्कच मोरवी के समक्ष उपस्थित हुए. मोरवी घटोत्कच के रूप एवं सौंदर्य पर मुग्ध हो गईं. मोरवी को आभास हुआ कि यह कोई साधारण पुरुष नहीं है, फिर भी उसने परीक्षा लेने की ठानी. मोरवी ने घटोत्कच से पूछा, “क्या आप मेरे प्रण के बारे में जानते हैं? आपको अपने विवेक और बल से मुझे परास्त करना होगा. इसमें प्राण भी जा सकते हैं.”

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See also  बर्बरीक के पूर्वजन्म की कथा और श्रीकृष्ण द्वारा पूजनीय होने का वरदान (भाग-3)