January 28, 2026

श्रीकृष्ण लौटे धाम, पटरानियां परेशानः व्रज की रज में खोजतीं फिरी विरह का ईलाज- श्रीकृष्ण भक्तिकथा


अब आप बिना इन्टरनेट के व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र , श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ तथा उपयोग कर सकते हैं.इसके लिए डाउनलोड करें प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प.
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मित्रों, सावन का पावन माह आरंभ हो रहा है. इस महीने में शिवजी की विशेष आराधना और शिव महिमा का श्रवण करना चाहिए. हम भगवान भोलेनाथ को समर्पित एक एप्प बना रहे हैं.

एप्प का काम अपेक्षा के अनुसार कुछ कारणों से आझ पूरा नहीं हो पाया लेकिन दो-तीन दिनों में हम इसे आरंभ करने के लिए भरपूर प्रयास में जुटे हैं. इसमें हम आपको शिवजी के प्रत्येक स्वरूपों का परिचय, उनकी आराधना, सभी उपयोगी मंत्रों और शिवपुराण से परिचित होंगे.

इसके अलावा बहुत कुछ होगा इस एप्प में. थोड़े में कहूं तो भगवान भोलेनाथ की पूजा-आराधना और भक्ति के लिए आपको एक संपूर्ण और संतुष्टिदायक ऐसा एप्प मिलने वाला है जो आपको शिवभक्ति के रस में सराबोर करेगा. अभी पढ़ें व्रज की महिमा की एक कथा-

जब भगवान श्रीकृष्ण पृथ्वी लोक पर अपनी लीला समाप्त करके अपने धाम को चले गए तब भगवान की विरह-वेदना में उनकी सोलह हजार रानियाँ दुखी रहने लगीं.

उन्होंने अपने प्रियतम प्रभु की चतुर्थ पटरानी यमुनाजी को आनंदित देखा. वह विरह वेदना से शोकाकुल नहीं थी. इससे रानियों को आश्चर्य हुआ. उन्होंने सरलभाव से यमुनाजी से कारण पूछ ही लिया.

रानियों ने कहा – बहिन कालिंदी! हमारी तरह तुम भी श्रीकृष्ण की पत्नी हो. हम तो विरहाग्नि में जली जा रही हैं किन्तु तुम्हारी यह स्थिति नहीं है. तुम प्रसन्न हो, इसका क्या कारण है?

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यमुनाजी ने कहा- बहनों, अपनी आत्मा में ही रमण करने के कारण हमारे प्रिय भगवान श्रीकृष्ण आत्माराम हैं और उनकी आत्मा हैं- श्रीराधाजी! मै दासी की भांति राधाजी की सेवा करती रहती हूं. उनकी सेवा का ही प्रभाव है कि विरह हमारा स्पर्श नहीं कर सकता.

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