January 28, 2026

शिव-पार्वती कथाः पुष्पदंत बना महान विद्वान कात्यायन, विंध्य वन में पिशाच कानभूति से भेंट. भाग-2

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मित्रों शिव-पार्वती की सुंदर कथा शृंखला महादेव शिव शंभु एप्पस में शुरू हुई है. उस शृंखला कीएक कथा यहां दे रहे हैं. पिछली कथा और पूरी शृंखला का आनंद लेने के लिए प्ले स्टोर में Mahadev Shiv Shambhu एप्पस सर्च करके डाउनलोड कर लें.

छुप-छुप कर भगवान शिव की कथा सुनने के अपराध में पुष्पदंत और उसका पक्ष लेने के चलते उसके दोस्त माल्यवान को मां पार्वती ने आवेश में शाप तो दे दिया पर जब शांत हुईं तो शापमुक्ति का उपाय भी बता दिया.

पार्वतीजी ने बताया कि सुप्रतीक यक्ष जो शाप के कारण पिशाच बनकर कानभूति नाम से विन्ध्य में रहता है उसे खोजो और वही कथा सुना जो तुमने वेश बदलकर चुपके से सुन ली थी. इससे तुम्हारी शापमुक्ति हो जाएगी. (पिछली कथा)

शाप देने के बाद ममतामयी मां पार्वती का मन इस बात के लिए कचोटता रहता था कि जरा सी बात पर उन्होंने अपने पति के प्रिय सेवकों को उनसे अलग कर दिया.

बहुत दिन सब्र के बाद एक दिन उन्होंने भगवान शिव से पूछ लिया- पुष्पदंत और माल्यवान का क्या हुआ, वे धरती पर गये तो पर उसके बाद उनका क्या हुआ? उनकी मुक्ति कब तक होने वाली है, लौटकर कैलाश कब आयेंगे?

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भगवान शिव ने बताया- धरती पर जाकर हमारा पुष्पदंत बहुत बड़ा ज्ञानी बन गया है. वह पाटलिपुत्र के राजा नन्द का मंत्री है. उसका नाम वररुचि है. वररूचि कात्यायन के नाम से भी प्रसिद्ध है. उसके समान अभी व्याकरण का कोई पंडित पृथ्वी पर नहीं.
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