January 29, 2026

पार्वतीजी ने कौतुक में मूंद दी महादेव की आंखें, अंधकार में डूबा ब्रह्मांड. देवी के स्पर्श से महादेव के शरीर से जन्मा एक अंधा बालकः अंधकासुर कथा भाग-एक


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हमने पहले भी बताया कि भोलेनाथ को समर्पित एप्प लाने की तैयारी चल रही है. दो-तीन दिनों में एप्प बन जाएगा. उसमें शिवजी की पूजा से जुडे सारे मंत्र, शिवलिगों के बारे में जानकारी, घर में शिव-गौरी पूजन विधि, उपयोगी मंत्र, पार्वतीजी की पूजा, शिव के विभिन्न स्वरूपों की पूजा विस्तृत होगी साथ ही शिवपुराण भी होगा.

कुल मिलाकर कह सकते हैं कि शिव-पार्वती की पूजा और उनकी महिमा से जुड़ी पढ़ने जानने योग्य चीजों के लिए आपको कहीं और जाने की जरूरत न होगी. आज आपको शिव पुराण में अंधकासुर की कथा दे रहे हैं, जो काफी पहले प्रकाशित हो चुकी है. कई लोगों ने इसकी मांग पिछले दिनों की थी.

भगवान शिव ने मंदार पर्वत पर लंबी समाधि लगाई थी. माता पार्वती को एक मजाक सूझा. उन्होंने अपने हाथों से भोलेनाथ की आंखें मूंद दीं.

महादेव के नेत्रों को स्वयं शक्तिस्वरूपा ने बंद किया था. इससे संसार में अंधकार छा गया. साधनारत महादेव का शरीर प्रचंड अग्नि की तरह जल रहा था.

माता के स्पर्श करते ही पसीने की बूंदें बनीं और धरती पर गिरीं. उससे एक भयंकर स्वरूप वाला जीव पैदा हुआ जो अंधकार के कारण जन्म से अंधा था.

उसका भयंकर स्वरूप देखकर स्वयं माता के मन में भय पैदा हुआ. महादेव ने कहा यह जीव आपके कौतुक के कारण हुए अंधकार में हम दोनों के स्पर्श से पैदा हुआ है इसलिए हमारी संतान जैसा है.

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हिरण्यकश्यपु का भाई असुरराज हिरण्याक्ष संतानहीन था. हिरण्यकश्यपु को एक बेटा था प्रह्लाद जिसकी रक्षा स्वयं नारायण ने नरसिंह अवतार लेकर की थी.
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