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कुम्हार बोला- प्रभु आप जिस घड़े के नीचे छिपे हैं उसकी मिट्टी मेरे बैल लाद के लाए हैं. मेरे बैलो को भी 84 के बंधन से मुक्त करो. श्रीकृष्ण ने कहा- चलो उन बैलों को भी 84 लाख योनियों के बंधन से मुक्त करता हूं.
अब तो तुम्हारी सारी इच्छा पूरी कर दी. अब तो घड़े से बाहर निकाल दो. कुम्हार ने कहा- एक और इच्छा है प्रभु. जो भी प्राणी हम दोनों के बीच का यह संवाद सुनेगा उसे भी 84 लाख योनियो के बंधन से मुक्त करो.
कुम्हार की परोपकार की बात से भक्तवत्सल भगवान बड़े प्रसन्न होते हैं. कुम्हार की इस इच्छा को भी पूरी कर दिया. तब जाकर कुम्हार ने प्रभु को घड़े से बाहर निकाला. प्रभु ने गले से लगा लिया और उसे जीवन और मृत्यु के चक्कर से मुक्त कर दिया.
जो प्रभु गोर्वधन को अपनी एक अंगुली पर उठा सकते हैं वह क्या एक घडा नही उठा सकते थे. यह लीला तो बस प्रभु ने अपने भक्त के हृदय की गहराई की थाह लेने के लिए की. अधिकमास में हम श्रीकृष्ण लीला का स्मरण करते रहेंगे.
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