भगवान भोलेनाथ ने उन ब्राह्माणकुमारों को मोक्ष प्रदान किया और अपने भक्तों की भयों से रक्षा के लिए स्वयं उस खाई में स्थित हो गए. उस स्थान के चारों ओर की भूमि लिंग रूपी भगवान शिव की स्थली बन गई.

उज्जयिनी क्षेत्र में स्थित महाकाल का दरबार भक्तों की पीड़ा का अंत करता है. भगवान शिव इस स्थान पर पृथ्वी पर महाकालेश्वर के नाम से प्रसिद्ध हुए और इसे ज्योतिर्लिंग कहा जाता है.

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी एक और लोकप्रिय लौकिक कथा है. महाकाल का स्वरूप अनंत है तो कथा का क्या ओर-छोर! भोलेनाथ की महिमा वर्णन से परे है. भक्त जिस रूप में देखे, भगावन उसे स्वीकार लेते हैं. महाकालेश्वर भगवान की दूसरी प्रचलित लौकिक कथा कल सुनाएंगे.

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