March 15, 2026

शिवपुराणः भस्म, त्रिपुंड और रूद्राक्ष पर क्या कहता है शिवपुराण? इन मंत्रों से घारण करें रूद्राक्ष

preview varanashi shiv

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें.

जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी। इस लाइऩ के नीचे फेसबुकपेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे.

[sc:fb]

शिवजी की पूरी पूजा कैसे होती है. अभिषेक के नियम क्या है. प्रदोष कैसे करना चाहिए. शिवजी के सभी मंत्र, पूजा विधि और शिवपुराण पढ़ने के लिए डाउनलोड करें- MAHADEV SHIV SHAMBHU APPS.

महादेव शिव शंभु एप्प डाउनलोड करने के लिए नीचे लिंक क्लिक करेंः
Android महादेव शिव शंभु

नैमिषारण्य में ऋषियों ने सूतजी से शिवलिंग और शिवलिंग की पूजा के संदर्भ में ज्ञान देने को कहा. हमें ज्ञान दें कि शिवलिंग की प्रतिष्ठा कैसे करनी चाहिए.

शिवलिंग के आकार-प्रकार, परिमाण संबंधित जो भी स्थापित परंपरा उसके बारे में ज्ञान देने के बाद सूतजी ने भस्म और रूद्राक्ष की जानकारी देनी आरंभ की. भस्म धारण करना शिवजी की पूजा का आवश्यक अंग है.

सूतजी बोले- सभी प्रकार के मंगलों को प्रदान करने वाली भस्म दो प्रकार की होती है- महाभस्म और भस्म.

भस्म के भी तीन प्रकार होते हैं- श्रौत भस्म, स्मार्त भस्म तथा सामान्य भस्म. श्रौत और स्मार्त भस्म के प्रयोग का अधिकार केवल साधक ब्राह्मणों को है.

श्रौत और स्मार्त भस्मों को मंत्रों के उच्चारण के साथ ही धारण करना चाहिए. सामान्य भस्म लगाने के लिए मंत्रपाठ करना कोई आवश्यक नहीं.

गाय के गोबर के उपले या कंडे को अग्नि से जलाने से जो भस्म प्राप्त होती है वह आग्नेय भस्म कहलाती है. इसी भस्म से मस्तक पर त्रिपुंड लगाना चाहिए.

See also  काम के बोझ से रहते हैं चिंतित तो गणेश जी से सीखिए निदान का तरीका

स्वयं भगवान शिव, श्रीविष्णु, मां पार्वती तथा लक्ष्मी आदि प्रमुख देवगण एवं देवियां अपने मस्तक पर भस्म धारण किए रहते हैं. ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र आदि सभी वर्णों, संकर वर्णों औऱ गर्भवती स्त्रियों को भी अपने मस्तक पर त्रिपुंड लगाने का अधिकार है.

साधक को भस्म लगाते समय मानस्तोक मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.

ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्ण के लोगों को अपने शरीर के शीर्ष, दोनों कंधों,ललाट, कंठ और वक्ष आदि अंगों, शूद्रों और स्त्रियों को दोनों घुटनों, दोनों पैर, पीठ तथा कमर आदि भागों में भस्म लगाना उचित है.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

Share: