January 28, 2026

मां की पहचान उसके रंग-रूप से नहीं, ममता से होती है. मातृ प्रेम को समर्पित कथा

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राजा के बारे में यह मशहूर था कि वह स्वयं भी बुद्धिमान है और उसके सभी दरबारी और मंत्री भी बड़े बुद्धिमान थे.

सौदागर ने राजा से कहा- महाराज ये गायें माँ-बेटी हैं परन्तु मुझे यह नहीं पता कि माँ कौन है व बेटी कौन, क्योंकि दोनों में खास अंतर नहीं है. लेकिन मुझे इसकी पहचान करनी है.

मैंने अनेक जगह पर लोगों से यह पूछा किंतु कोई भी इन दोनों में माँ-बेटी की पहचान नहीं कर पाया. मुझे लोगों ने बताया कि केवल आप ही हैं जहां इसका निर्णय हो सकता है.

राजा के दरबार में एक बुजुर्ग मंत्री थे जो राजा के मुख्य सलाहकार थे और उनकी बुद्धि का सभी लोहा मानते थे. राजा ने मंत्री से सौदागर की मुश्किल का हल निकालने को कहा.

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