January 28, 2026

भगवान श्रीरामचंद्रजी ने मां सीता को ही दे दिया दान में

आप सभी Maa Durga Laxmi Sharnam एप्पस जरूर डाउनलोड कर लें. नवरात्रों में माता की आराधना में आपको बहुत सहायता मिलेगी. प्ले स्टोर से डाउनलोड कर लें या यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करें. विनती है कि कृपया एप्प की रेटिंग जरूर कर दें.

पौराणिक कथाएँ, व्रत त्यौहार की कथाएँ, चालीसा संग्रह, भजन व मंत्र, गीता ज्ञान-अमृत, श्रीराम शलाका प्रशनावली, व्रत त्यौहार कैलेंडर इत्यादि पढ़ने के हमारा लोकप्रिय ऐप्प “प्रभु शरणम् मोबाइल ऐप्प” डाउनलोड करें.

Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें

[sc:fb]

मर्यादा पुरुषोत्तम की लीला अपरंपार है. उनके द्वारा सीता जी को दान में देने के पीछे भी एक गहरा संदेश छिपा हुआ था जिसको उन्होंने अपनी लीला और गुरु वशिष्ठ मुनि जरिये समाज तक पहुंचाया.

रावण विजय से लौट आने के बाद की बात है. भगवान श्रीराम ने इस बार बहुत विशाल अश्वमेध यज्ञ किया. इस यज्ञ की पूरी धरती पर चर्चा थी. खूब दान बांटा जा रहा था. उत्साहित हो भगवान ने घोषणा की कि, यदि कोई मुझसे कौस्तुभ मणि, कामधेनु, अयोध्या का राज्य, पुष्पक विमान और यहां तक कि सीता जी को भी दान में मांगेगा तो मैं खुशी खुशी दे दूंगा.

इस घोषणा का प्रचार दूर दूर तक हुआ पर किसी में इतनी हिम्मत या सामर्थ्य कहां कि ऐसी वस्तुएं दान में मांगे. कोई सामने न आया. ठीक राम जन्म के दिन यज्ञ सकुशल संपन्न हो गया. देवताओं ने फूल बरसाये तो नगर निवासियों ऋषि मुनियों और भगवान राम का दर्शन सुख लिया.

अब भगवान श्रीराम द्वारा अपने गुरु को दान देने की बारी थी. भगवान श्रीराम ने चिंतामणि और कमधेनु को श्री वशिष्ठ को देने की घोषणा की. पर वशिष्ठ दान लेने के लिये आगे ही नहीं आये. तो श्रीराम द्वारा उनसे दान स्वीकारने की प्रार्थना की गयी.

See also  दशरथ और शनि में संघर्ष, राजा के पराक्रम से प्रसन्न शनि ने की अयोध्या पर कृपा. राजा दशरथ द्वारा शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए शनिस्तोत्र रचने की कथा

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

Share: