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अपना बकरी जैसा मुख देखते ही उसे अपने पिछले जन्म की याद हो आई. उसने अपने माता-पिता को अपने पिछले जन्म के बारे में सब कुछ बता दिया और कहा कि मुझे अपना चेहरा ठीक करने के लिये खम्भार्क-क्षेत्र जाना होगा.

माता पिता की अनुमति लेकर कुमारी वहां पहुंची और उसने अपने पिछले जन्म के सिर को लताओं में से ढूंढ़ निकाला और उसका खम्भार्क तीर्थ में दाह संस्कार किया. हड्डियों और राख को खम्भार्क तीर्थ के पवित्र जल में डाल दिया.

यह सब करने के तुरंत बाद उसका मुख मानव सरीखा हो गया और चंद्रमा के समान चमक उठा. इस चमत्कार का तीनों लोकों में प्रचार हो गया. सारी बात सुनकर देवता, गंधर्व और राजा लोग विवाह के लिए उसके पिता के पास आने लगे.
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