[sc:fb]
दुर्गम को जब यह समाचार मिला तो उसने भी अपनी विशाल सेना के साथ देवी का सामना किया. देवों की सेना और असुर सेना में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया. परंतु दुर्गम तो ब्रह्माजी के वरदान की छाया में था.
दुर्गम को देवताओं की सेना किसी भी प्रकार से पराजित नहीं कर पा रही थी. तब भगवती ने अपने अंश से कालिका, तारिणी, बगला, मातंगी, छिन्नमस्तिका, तुलजा, कामाक्षी, भैरवी आदि अनेक देवियों को प्रकट किया और उनके साथ दुर्गम से युद्ध करने लगीं.
अंत में माता जगदम्बा ने सभी अस्त्र-शस्त्रों से युक्त होकर दुर्गम के साथ भीषण संग्राम शुरू किया. माता के अंश से प्रकट हुई देवियां अजन्मा थीं. वह तो उनकी शक्तियों का समूह थीं इसलिए वे ब्रह्माजी के वरदान कवच को भेद सकती थीं.
अंततः भगवती ने दुर्गम का वध कर दिया. माता ने देवताओं को दुर्गम के भय से मुक्ति दिलाई थी इसलिए देवों ने भगवती की दुर्गा नाम से स्तुति करते हुए पुष्पवर्षा की. दुर्गम का वध करने के कारण भगवती के शक्तिस्वरूप का नाम दुर्गा पड़ा.
Android मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
iOS मोबाइल ऐप्प के लिए क्लिक करें
ये भी पढ़ें-
कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा पूर्ण क्यों नहीं होती
माता को प्रसन्न करने के लिए किस तिथि को चढ़ाएं कौन सा प्रसाद
nice approach
आपके शुभ वचनों के लिए हृदय से कोटि-कोटि आभार.
आप नियमित पोस्ट के लिए कृपया प्रभु शरणम् से जुड़ें. ज्यादा सरलता से पोस्ट प्राप्त होंगे और हर अपडेट आपको मिलता रहेगा. हिंदुओं के लिए बहुत उपयोगी है. आप एक बार देखिए तो सही. अच्छा न लगे तो डिलिट कर दीजिएगा. हमें विश्वास है कि यह आपको इतना पसंद आएगा कि आपके जीवन का अंग बन जाएगा. प्रभु शरणम् ऐप्प का लिंक? https://goo.gl/tS7auA