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दुर्गम को जब यह समाचार मिला तो उसने भी अपनी विशाल सेना के साथ देवी का सामना किया. देवों की सेना और असुर सेना में भयंकर युद्ध आरम्भ हो गया. परंतु दुर्गम तो ब्रह्माजी के वरदान की छाया में था.

दुर्गम को देवताओं की सेना किसी भी प्रकार से पराजित नहीं कर पा रही थी. तब भगवती ने अपने अंश से कालिका, तारिणी, बगला, मातंगी, छिन्नमस्तिका, तुलजा, कामाक्षी, भैरवी आदि अनेक देवियों को प्रकट किया और उनके साथ दुर्गम से युद्ध करने लगीं.

अंत में माता जगदम्बा ने सभी अस्त्र-शस्त्रों से युक्त होकर दुर्गम के साथ भीषण संग्राम शुरू किया. माता के अंश से प्रकट हुई देवियां अजन्मा थीं. वह तो उनकी शक्तियों का समूह थीं इसलिए वे ब्रह्माजी के वरदान कवच को भेद सकती थीं.

अंततः भगवती ने दुर्गम का वध कर दिया. माता ने देवताओं को दुर्गम के भय से मुक्ति दिलाई थी इसलिए देवों ने भगवती की दुर्गा नाम से स्तुति करते हुए पुष्पवर्षा की. दुर्गम का वध करने के कारण भगवती के शक्तिस्वरूप का नाम दुर्गा पड़ा.

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2 COMMENTS

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