January 28, 2026

नारद की भी जरूरत है.

narada_b_101214

प्रभु शरणं के पोस्ट की सूचना WhatsApp से चाहते हैं तो अपने मोबाइल में हमारा नंबर 9871507036 Prabhu Sharnam के नाम से save कर लें। फिर SEND लिखकर हमें उस नंबर पर whatsapp कर दें.

जल्दी ही आपको हर पोस्ट की सूचना whatsapp से मिलने लगेगी। इस लाइऩ के नीचे फेसबुकपेज का लिंक है. इसे लाइक कर लें ताकि आपको पोस्ट मिलती रहे.

[sc:fb]

एक बार सभी देवताओं की सभा हो रही थी. वे सभी नारदजी के बार-बार आने से परेशान थे.

उन्होंने सोचा- “नारद जी हम सबको परेशान करते रह्ते हैं. जब मन में आता है, आ जाते हैं. इधर उधर की बातों में हमारा समय खराब करते हैं. हमें किसी भी तरह इनसे छुटकारा पाना होगा.”

सभी देवताओं ने अपने अपने द्वारपाल से कहा- “नारद जी आएँ तो उन्हें अंदर न आने देना. किसी भी दशा में उन्हें अंदर प्रवेश न करने देना. कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल देना.”

अगले दिन नारद जी शिवजी से मिलने कैलाश पर्वत पहुंचे. नंदी ने भी उन्हें वहीं रोक दिया. नारदजी हैरान हो गए.

नंदी ने कहा- “हे देवर्षि! आप कही और जा कर वीणा बजाइए. भगवान शंकर से आप नहीं मिल पायेंगे.” यह सुनकर नारदजी सकपका गए.

जब नंदी ने उन्हें सारी बात बतायी तो वे क्रोध से आग-बबूला हो गए और सीधे क्षीरसागर विष्णु भगवान से शिकायत करने पहुंचे. नारदजी जैसे ही क्षीरसागर पहुंचे, गरूड ने उनका रास्ता रोक लिया.

नारदजी नई गरूड़ को बहुत समझाया, परंतु गरूड़ टस से मस नही हुये. हारकर वे वहां से वापस आ गए क्योंकि अब स्वर्ग लोक के सारे दरवाजे बंद हो चुके थे.

See also  हनुमान के अलावा कौन थे श्रीराम के श्रेष्ठ भक्त आप को जरूर जानना चाहिए

अब नारद जी ने देवताओं से अपने अपमान का बदला लेने की सोची परन्तु उन्हें कोई रास्ता नही सूझ रहा था. एक दिन वे घूमते-घूमते काशी पहुंचे.

शेष अगले पेज पर. नीचे पेज नंबर पर क्लिक करें.

Share: