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तीनों देवियों ने एक-एक बालक उठा लिया. त्रिदेव अपने असली रूप में आए. सरस्वती ने शिवजी को, लक्ष्मी ने ब्रह्मा को और पार्वती ने विष्णु को उठा लिया था. तीनों लज्जित हुईं. उन्होंने अनुसूया के सतीत्व को प्रणाम किया. त्रिदेवों ने अनुसूया से वरदान मांगने को कहा.

अनुसूया ने मांगा कि तीनों के अंश उनके संतान के रूप में जन्म लें. वरदान देकर त्रिदेव अपनी पत्नियों समेत चले गए. ब्रह्माजी के अंश से चंद्रमा, विष्णुजी के अंश से दत्तात्रेय और शिवजी के अंश से दुर्वासा मुनि ने देवी अनुसूया के घर में जन्म लिया. ये तीनों त्रिदेवों के अंशावतार कहे जाते हैं.

संकलन व संपादनः राजन प्रकाश
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