Yamraj
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एक साधु निर्जन स्थान पर आश्रम बनाकर रहते थे. उनके आश्रम में भक्तिभजन प्रवचन आदि चलते रहते थे. वहां पर भक्तों की आवाजाही लगी रहती थी.

साधु अपने अनुयायियों को ईश्वर में श्रद्धा रखने और बुराइयों से दूर रहने की सीख देते थे. उनके वचनों में एक आकर्षण था. भक्त भाव विभोर होकर उनके प्रवचन सुना करते थे.

आश्रम के पास एक जंगल में एक डाकू रहता था. उससे लोग बहुत डरते थे. उसकी एक खास बात यह थी कि वह सिर्फ अमीरों से धन लूटता था लेकिन गरीबों को कभी नहीं सताता था.

अजीब संयोग यह हुआ कि साधु और डाकू की मृत्यु एक ही दिन और एक ही समय पर हुई. मरने के बाद दोनों यमराज के दरबार में पहुंचे. वहां उन के कर्मों का बही खाता खुला.

बही-खाता देखने के बाद यमराज ने कहा- अब तुम्हारी किस्मत का फैसला होने वाला है. तुम्हें अपने बारे में कुछ विशेष कहना है तो कह सकते हो.
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