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हलमादाय सौनन्दं नमस्ते पुरुषोत्तम।
प्रतीच्यां रक्ष मे विष्णो त्वामहं शरणं गत:।।3

हे पुरुषोत्तम! आपको नमस्कार है. हाथों में सौनन्द हल लेकर पश्चिम दिशा से मुझ शरणागत की रक्षा करें)

मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम्।
उत्तरस्यां जगन्नाथ भवन्तं शरणं गत:।।4

हे पुण्डरीकाक्ष! आपको नमस्कार है. हाथों में शातन मुसल धारणकर जगन्नाथ आप उत्तर दिशा से मेरी रक्षा करें.

शारंगमादाय च धनुरस्त्रं नारायणं हरे।
नमस्ते रक्ष रक्षोघ्न ऐशान्यां शरणं गत:।।5

हे नारायण! आपको नमस्कार है. हाथों में शारंग धनुष धारण कर हे रक्षोघ्न आप ईशान कोण(उत्तर-पूर्व) से मुझ शरणागत की रक्षा करें.
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